श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 69: संजयका धृतराष्ट्रको श्रीकृष्ण-प्राप्ति एवं तत्त्वज्ञानका साधन बताना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.69.17 
संजय उवाच
नाकृतात्मा कृतात्मानं जातु विद्याज्जनार्दनम्।
आत्मनस्तु क्रियोपायो नान्यत्रेन्द्रियनिग्रहात्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा- महाराज! जिसने अपने मन को वश में नहीं किया है, वह कभी भी सनातन पूर्ण परमात्मा भगवान श्रीकृष्ण को प्राप्त नहीं कर सकता। अपनी समस्त इन्द्रियों को वश में किए बिना अन्य कोई भी कर्म ईश्वर प्राप्ति का मार्ग नहीं हो सकता। 17॥
 
Sanjay said- Maharaj! One who has not controlled his mind can never attain the eternally perfect Supreme Soul Lord Shri Krishna. Without controlling all your senses, no other work can be a way to attain God. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)