श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 69: संजयका धृतराष्ट्रको श्रीकृष्ण-प्राप्ति एवं तत्त्वज्ञानका साधन बताना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.69.15 
एष एकायन: पन्था येन यान्ति मनीषिण:।
तं दृष्ट्वा मृत्युमत्येति महांस्तत्र न सज्जति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
यह ज्ञानमार्ग ही एकमात्र ऐसा मार्ग है जो परमात्मा की प्राप्ति करा सकता है। जिस मार्ग पर ज्ञानी पुरुष चलते हैं, उसे देखकर या जानकर मनुष्य जन्म-मरण रूप संसार से पार हो जाता है और वह महापुरुष कभी इस संसार में आसक्त नहीं होता।॥15॥
 
This path of knowledge is the only path that can help one attain God. On seeing or knowing the path on which the wise men walk, a man transcends the world of birth and death and that great man never gets attached to this world.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)