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mahabharat 5.68.1: संजय ने कहा- राजन! अर्जुन और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ही परम पूज्य धनुर्धर हैं। वे (यद्यपि वे नर और नारायण हैं, जो सदैव साथ-साथ रहते हैं) लोक-कल्याण की इच्छा से पृथक-पृथक प्रकट हुए हैं और सब कुछ करने में समर्थ हैं। 1॥   |   mahabharat अध्याय 5.68: संजयका धृतराष्ट्रको भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमा बतलाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 68: संजयका धृतराष्ट्रको भगवान‍् श्रीकृष्णकी महिमा बतलाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.68.1 
संजय उवाच
अर्जुनो वासुदेवश्च धन्विनौ परमार्चितौ।
कामादन्यत्र सम्भूतौ सर्वभावाय सम्मितौ॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा- राजन! अर्जुन और भगवान श्रीकृष्ण दोनों ही परम पूज्य धनुर्धर हैं। वे (यद्यपि वे नर और नारायण हैं, जो सदैव साथ-साथ रहते हैं) लोक-कल्याण की इच्छा से पृथक-पृथक प्रकट हुए हैं और सब कुछ करने में समर्थ हैं। 1॥
 
Sanjay said- Rajan! Both Arjuna and Lord Krishna are very respected archers. They (although they are Nar and Narayan who always live together) have appeared separately with the desire of public welfare and are capable of doing everything. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)