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mahabharat 5.67.8: वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! संजय के ऐसा कहने पर (धृतराष्ट्र के कहने पर) गांधारी और महर्षि व्यास वहाँ आये। विदुरजी ने उन्हें यहाँ बुलाया और शीघ्र ही सभाभवन में ले आये।   |   mahabharat अध्याय 5.67: धृतराष्ट्रके पास व्यास और गान्धारीका आगमन तथा व्यासजीका संजयको श्रीकृष्ण और अर्जुनके सम्बन्धमें कुछ कहनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 67: धृतराष्ट्रके पास व्यास और गान्धारीका आगमन तथा व्यासजीका संजयको श्रीकृष्ण और अर्जुनके सम्बन्धमें कुछ कहनेका आदेश  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.67.8 
वैशम्पायन उवाच
इत्युक्तेन च गान्धारी व्यासश्चात्राजगाम ह।
आनीतौ विदुरेणेह सभां शीघ्रं प्रवेशितौ॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! संजय के ऐसा कहने पर (धृतराष्ट्र के कहने पर) गांधारी और महर्षि व्यास वहाँ आये। विदुरजी ने उन्हें यहाँ बुलाया और शीघ्र ही सभाभवन में ले आये।
 
Vaishampayana says- Janamejaya! On Sanjaya saying this (at the instigation of Dhritarashtra) Gandhari and Maharishi Vyasa came there. Vidurji called them here and brought them quickly to the assembly hall.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)