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mahabharat 5.67.7: हे प्रभु! वे दोनों धर्म के ज्ञाता, विचार में कुशल और तत्त्व को समझने वाले हैं; अतः वे आपकी मिथ्या दृष्टि को दूर कर देंगे। मैं उनके सामने श्रीकृष्ण और अर्जुन के विचार पूर्ण रूप से आपको बताऊँगा॥ 7॥   |   mahabharat अध्याय 5.67: धृतराष्ट्रके पास व्यास और गान्धारीका आगमन तथा व्यासजीका संजयको श्रीकृष्ण और अर्जुनके सम्बन्धमें कुछ कहनेका आदेश   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 67: धृतराष्ट्रके पास व्यास और गान्धारीका आगमन तथा व्यासजीका संजयको श्रीकृष्ण और अर्जुनके सम्बन्धमें कुछ कहनेका आदेश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.67.7 
तौ तेऽसूयां विनयेतां नरेन्द्र
धर्मज्ञौ तौ निपुणौ निश्चयज्ञौ।
तयोस्तु त्वां संनिधौ तद् वदेयं
कृत्स्नं मतं केशवपार्थयोर्यत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! वे दोनों धर्म के ज्ञाता, विचार में कुशल और तत्त्व को समझने वाले हैं; अतः वे आपकी मिथ्या दृष्टि को दूर कर देंगे। मैं उनके सामने श्रीकृष्ण और अर्जुन के विचार पूर्ण रूप से आपको बताऊँगा॥ 7॥
 
O Lord! Both of them are knowledgeable about religion, are skilled in thought and understand principles; hence they will remove your wrong vision. I will tell you in full the thoughts of Shri Krishna and Arjun in front of them. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)