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यथा श्रुतं ते वदतो महात्मनो
मधुप्रवीरस्य वच: समाहितम्।
तथैव वाच्यं भवता हि मद्वच:
समागतेषु क्षितिपेषु सर्वश:॥ १२॥
अनुवाद
संजय! मधुवंश के अधिपति वीर महात्मा श्रीकृष्ण ने एकाग्र मन से जो कुछ कहा है, उसे ठीक वैसा ही कहो जैसा तुमने सुना है। फिर यहाँ एकत्रित हुए समस्त राजाओं से कहो।
Sanjay! Whatever the brave Mahatma Shri Krishna, the chief of the Madhuvansh, has said with a concentrated mind, tell it to him exactly as you have heard it. Then tell this to all the kings gathered here.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥