श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 65: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.65.3 
युधिष्ठिरं हि कौन्तेयं परं धर्ममिहास्थितम्।
परां गतिमसम्प्रेत्य न त्वं जेतुमिहार्हसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर उत्तम धर्म का आश्रय लेकर यहाँ रहते हैं। उन्हें बिना मरे जीतना तुम्हारे लिए कदापि संभव नहीं है॥3॥
 
Kunti's son Yudhishthira lives here taking shelter of the best religion. It is never possible for you to defeat him without dying. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)