vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 5: उद्योग पर्व
»
अध्याय 65: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना
»
श्लोक 3
श्लोक
5.65.3
युधिष्ठिरं हि कौन्तेयं परं धर्ममिहास्थितम्।
परां गतिमसम्प्रेत्य न त्वं जेतुमिहार्हसि॥ ३॥
अनुवाद
कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर उत्तम धर्म का आश्रय लेकर यहाँ रहते हैं। उन्हें बिना मरे जीतना तुम्हारे लिए कदापि संभव नहीं है॥3॥
Kunti's son Yudhishthira lives here taking shelter of the best religion. It is never possible for you to defeat him without dying. ॥ 3॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×