Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.65.16: देखो, जब अकेले अर्जुन ने ऐसा अद्भुत कार्य किया है, तो फिर सब भाई मिलकर क्या नहीं कर सकते? इसलिए तुम पाण्डवों को अपना भाई समझकर उन्हें उनकी सम्पत्ति देकर उनके साथ भाईचारा बढ़ाओ॥16॥ | mahabharat अध्याय 5.65: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अर्जुनस्तत् तथाकार्षीत् किं पुन: सर्व एव ते।
स भ्रातॄनभिजानीहि वृत्त्या तं प्रतिपादय॥ १६॥
अनुवाद
देखो, जब अकेले अर्जुन ने ऐसा अद्भुत कार्य किया है, तो फिर सब भाई मिलकर क्या नहीं कर सकते? इसलिए तुम पाण्डवों को अपना भाई समझकर उन्हें उनकी सम्पत्ति देकर उनके साथ भाईचारा बढ़ाओ॥16॥
See, when Arjuna alone has done such a wonderful deed, then what cannot all the brothers do together? Therefore, you should consider the Pandavas as your brothers and give them their profession (property) and increase brotherhood with them.॥ 16॥
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि यानसंधिपर्वणि धृतराष्ट्रवाक्ये पञ्चषष्टितमोऽध्याय:॥ ६५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत यानसंधिपर्वमें धृतराष्ट्रवाक्यविषयक पैंसठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ६५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥