Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.65.12-13: मैं भी कौरवों के हित के विषय में सोचता हूँ; अतः मेरी भी बात सुनो। आचार्य द्रोण, कृपाचार्य, विकर्ण और महाराज बाह्लीक - ये भी तुम्हारे हितैषी हैं; अतः तुम उनका भी उतना ही आदर करो जितना मेरा करते हो। हे भरतपुत्र! ये सभी लोग धर्म में पारंगत हैं और दोनों पक्षों के लोगों पर समान स्नेह रखते हैं॥ 12-13॥ | mahabharat अध्याय 5.65: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मां च ब्रुवाणं शुश्रूष कुरूणामर्थदर्शिनम्।
द्रोणं कृपं विकर्णं च महाराजं च बाह्लिकम्॥ १२॥
एते ह्यपि यथैवाहं मन्तुमर्हसि तांस्तथा।
सर्वे धर्मविदो ह्येते तुल्यस्नेहाश्च भारत॥ १३॥
अनुवाद
मैं भी कौरवों के हित के विषय में सोचता हूँ; अतः मेरी भी बात सुनो। आचार्य द्रोण, कृपाचार्य, विकर्ण और महाराज बाह्लीक - ये भी तुम्हारे हितैषी हैं; अतः तुम उनका भी उतना ही आदर करो जितना मेरा करते हो। हे भरतपुत्र! ये सभी लोग धर्म में पारंगत हैं और दोनों पक्षों के लोगों पर समान स्नेह रखते हैं॥ 12-13॥
I too think about the welfare of the Kauravas; therefore listen to me too. Acharya Drona, Kripa, Vikarna and Maharaja Bahlik - they too are your well-wishers; therefore you should respect them as much as you respect me. O son of Bharata! All these people are well-versed in Dharma and have equal affection for people of both sides.॥ 12-13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥