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mahabharat 5.65.11: तात! तुम्हें अपने कल्याण की बात कहने वाले सज्जनों और मित्रों की सलाह के अनुसार कार्य करना चाहिए। वृद्ध शान्तनुनंदन भीष्म तुम्हारे पितामह हैं। तुम उनकी हर बात को सहन करते हो। 11॥   |   mahabharat अध्याय 5.65: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 65: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.65.11 
तिष्ठ तात सतां वाक्ये सुहृदामर्थवादिनाम्।
वृद्धं शान्तनवं भीष्मं तितिक्षस्व पितामहम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
तात! तुम्हें अपने कल्याण की बात कहने वाले सज्जनों और मित्रों की सलाह के अनुसार कार्य करना चाहिए। वृद्ध शान्तनुनंदन भीष्म तुम्हारे पितामह हैं। तुम उनकी हर बात को सहन करते हो। 11॥
 
Tat! You should act as per the advice of good people and friends who tell you about your welfare. Old Shantanunandan Bhishma is your grandfather. You tolerate everything they say. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)