श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.64.9 
तौ युध्यमानौ संरब्धौ मृत्युपाशवशानुगौ।
उपसृत्यापरिज्ञातो जग्राह मृगहा तदा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जब मृत्यु के जाल में फँसे हुए पक्षी अत्यन्त क्रोधपूर्वक एक दूसरे से लड़ रहे थे, उसी समय व्याध चुपचाप उनके पास आया और उन दोनों को पकड़ लिया॥9॥
 
When the birds, caught in the snare of death, were fighting with each other in utter anger, at that very time the hunter silently came near them and caught both of them.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)