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mahabharat 5.64.6: हे शिकारी! मुझे यह बात बड़ी विचित्र और आश्चर्यजनक लगती है कि तू आकाश में उड़ते हुए इन दो पक्षियों के पीछे पृथ्वी पर पैदल ही दौड़ रहा है।॥6॥   |   mahabharat अध्याय 5.64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.64.6 
विचित्रमिदमाश्चर्यं मृगहन् प्रतिभाति मे।
प्लवमानौ हि खचरौ पदातिरनुधावसि॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे शिकारी! मुझे यह बात बड़ी विचित्र और आश्चर्यजनक लगती है कि तू आकाश में उड़ते हुए इन दो पक्षियों के पीछे पृथ्वी पर पैदल ही दौड़ रहा है।॥6॥
 
Hey hunter! It seems very strange and surprising to me that you are running on foot on the earth after these two birds flying in the sky.' ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)