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mahabharat 5.64.5: कुरुनन्दन! उन आकाशगामी पक्षियों के पीछे-पीछे भूमि पर पैदल दौड़ते हुए उन व्याधसे मुनि ने निम्न श्लोक के अनुसार प्रश्न किया - 5॥   |   mahabharat अध्याय 5.64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.64.5 
तावन्तरिक्षगौ शीघ्रमनुयान्तं महीचरम्।
श्लोकेनानेन कौरव्य पप्रच्छ स मुनिस्तदा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! उन आकाशगामी पक्षियों के पीछे-पीछे भूमि पर पैदल दौड़ते हुए उन व्याधसे मुनि ने निम्न श्लोक के अनुसार प्रश्न किया - 5॥
 
Kurunandan! That Vyadhse Muni, who was running on foot on the ground following those sky-flying birds, asked a question according to the following verse - 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)