Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.64.3: पक्षी पकड़ने वाले को उन दोनों को आकाश में उड़ते देखकर भी दुःख या निराशा नहीं हुई। वे जहाँ भी जाते, वह उनके पीछे दौड़ता रहा।   |   mahabharat अध्याय 5.64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.64.3 
तौ विहायसमाक्रान्तौ दृष्ट्वा शाकुनिकस्तदा।
अन्वधावदनिर्विण्णो येन येन स्म गच्छत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
पक्षी पकड़ने वाले को उन दोनों को आकाश में उड़ते देखकर भी दुःख या निराशा नहीं हुई। वे जहाँ भी जाते, वह उनके पीछे दौड़ता रहा।
 
The bird catcher did not feel sad or disheartened even after seeing them both flying in the sky. He kept running after them wherever they went. 3.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)