द्रुपदो मत्स्यराजश्च संक्रुद्धश्च धनंजय:।
न शेषयेयु: समरे वायुयुक्ता इवाग्नय:॥ २६॥
अनुवाद
राजा द्रुपद, मत्स्यराज विराट और क्रोध में भरे हुए अर्जुन - ये तीनों जब वायु के सहारे होकर तीन प्रकार की प्रज्वलित अग्नियों के समान रणभूमि पर आक्रमण करेंगे, तब किसी को भी जीवित नहीं छोड़ेंगे॥ 26॥
King Drupada, King Virata of Matsya and Arjuna filled with anger - when these three, supported by the wind, attack the battlefield like the three kinds of fires blazing, they will not leave anyone alive.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥