श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.64.22 
तथैव तव पुत्रोऽयं पृथिवीमेक इच्छति।
मधु पश्यति सम्मोहात् प्रपातं नानुपश्यति॥ २२॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार आपका पुत्र दुर्योधन भी सम्पूर्ण जगत् का राज्य अकेले ही भोगना चाहता है। आसक्ति के कारण उसे केवल मधु ही दिखाई देता है, उसे भावी पतन या विनाश दिखाई नहीं देता।॥22॥
 
Similarly, your son Duryodhan wants to enjoy the kingdom of the whole world alone. Due to his attachment, he only sees Madhu, he does not see the future downfall or destruction. ॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)