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mahabharat 5.64.18: वहाँ हम सबने देखा कि पर्वत की एक दुर्गम गुफा में, जहाँ से तट न होने के कारण गिरने की प्रबल संभावना है, एक छत्ता था। वह मधुमक्खियों का नहीं बना था। उसका रंग सोने के समान पीला था और वह घड़े के समान प्रतीत होता था।॥18॥   |   mahabharat अध्याय 5.64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.64.18 
तत्रापश्याम वै सर्वे मधु पीतकमाक्षिकम्।
मरुप्रपाते विषमे निविष्टं कुम्भसम्मितम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वहाँ हम सबने देखा कि पर्वत की एक दुर्गम गुफा में, जहाँ से तट न होने के कारण गिरने की प्रबल संभावना है, एक छत्ता था। वह मधुमक्खियों का नहीं बना था। उसका रंग सोने के समान पीला था और वह घड़े के समान प्रतीत होता था।॥18॥
 
There we all saw that in a remote cave of the mountain, from where there is a high probability of falling due to the absence of any bank, there was a honeycomb. It was not made by bees. Its colour was yellow like gold and it appeared like a pot.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)