श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.64.15 
इदमन्यत् प्रवक्ष्यामि यथा दृष्टं गिरौ मया।
श्रुत्वा तदपि कौरव्य यथा श्रेयस्तथा कुरु॥ १५॥
 
 
अनुवाद
कौरव नन्दन! पूर्वकाल में पर्वत पर जो कुछ मैंने देखा था, उसके अनुसार मैं तुमसे दूसरी बात कहता हूँ। इसे सुनकर तुम जो कुछ अपने लिए अच्छा समझो, वही करो॥ 15॥
 
Kaurava Nandan! I am telling you another thing according to what I had seen on a mountain in the past. After listening to this, do whatever you think is good for you.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)