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mahabharat 5.64.11: एक साथ भोजन करना, एक दूसरे से प्रेमपूर्वक बातें करना, एक दूसरे के सुख-दुःख पूछना और सदैव एक दूसरे से मिलते रहना - ये भाइयों के कर्तव्य हैं; एक दूसरे का विरोध करना कभी उचित नहीं है ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 5.64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.64.11 
सम्भोजनं संकथनं सम्प्रश्नोऽथ समागम:।
एतानि ज्ञातिकार्याणि न विरोध: कदाचन॥ ११॥
 
 
अनुवाद
एक साथ भोजन करना, एक दूसरे से प्रेमपूर्वक बातें करना, एक दूसरे के सुख-दुःख पूछना और सदैव एक दूसरे से मिलते रहना - ये भाइयों के कर्तव्य हैं; एक दूसरे का विरोध करना कभी उचित नहीं है ॥11॥
 
Eating together, talking to each other with love, inquiring about each other's joys and sorrows, and always meeting each other - these are the duties of brothers; it is never right to oppose one another. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)