श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 64: विदुरका कौटुम्बिक कलहसे हानि बताते हुए धृतराष्ट्रको संधिकी सलाह देना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.64.1 
विदुर उवाच
शकुनीनामिहार्थाय पाशं भूमावयोजयत्।
कश्चिच्छाकुनिकस्तात पूर्वेषामिति शुश्रुम॥ १॥
 
 
अनुवाद
विदुर जी बोले - पिताजी! हमने अपने पूर्वजों से सुना है कि एक समय एक पक्षी पकड़ने वाले ने पक्षियों को फँसाने के लिए पृथ्वी पर जाल फैलाया था।
 
Vidur ji said - Father! We have heard from our ancestors that once upon a time a bird catcher spread a net on the earth to trap birds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)