श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 63: दुर्योधनद्वारा अपने पक्षकी प्रबलताका वर्णन करना और विदुरका दमकी महिमा बताना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.63.21 
कर्मणाऽऽचरितं पूर्वं सद्भिराचरितं च यत्।
तदेवास्थाय मोदन्ते दान्ता: शमपरायणा:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जो कर्तव्य कर्मों द्वारा सम्पन्न होते हैं और जिनका आचरण पूर्वकाल के पुण्यात्माओं ने किया है, उन्हें अपनाकर संयमी पुरुष सदैव आनन्द से परिपूर्ण रहते हैं ॥ 21॥
 
By adopting the duties which are performed through actions and which have been practised by the virtuous souls of the past, men endowed with self-control remain always filled with joy. ॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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