Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.63.20: जो सभी प्राणियों का कल्याण चाहता है और सभी के प्रति मैत्रीभाव रखता है, वह किसी को भी कष्ट नहीं पहुँचाता। जो समुद्र के समान अगाध ज्ञान-अमृत से संतुष्ट है, वह परम शांति को प्राप्त करता है। | mahabharat अध्याय 5.63: दुर्योधनद्वारा अपने पक्षकी प्रबलताका वर्णन करना और विदुरका दमकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्वभूतहितो मैत्रस्तस्मान्नोद्विजते जन:।
समुद्र इव गम्भीर: प्रज्ञातृप्त: प्रशाम्यति॥ २०॥
अनुवाद
जो सभी प्राणियों का कल्याण चाहता है और सभी के प्रति मैत्रीभाव रखता है, वह किसी को भी कष्ट नहीं पहुँचाता। जो समुद्र के समान अगाध ज्ञान-अमृत से संतुष्ट है, वह परम शांति को प्राप्त करता है।
He who seeks the welfare of all beings and is friendly towards all, does not cause any disturbance to anyone. He who is satisfied with the nectar of knowledge which is as deep as the ocean, attains the ultimate peace.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥