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mahabharat 5.63.18: जो मनुष्य सदाचारी, सदाचारी, प्रसन्नचित्त और आत्मज्ञानी विद्वान है, वह इस लोक में सम्मान पाता है और मृत्यु के बाद उत्तम जीवन पाता है ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 5.63: दुर्योधनद्वारा अपने पक्षकी प्रबलताका वर्णन करना और विदुरका दमकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 63: दुर्योधनद्वारा अपने पक्षकी प्रबलताका वर्णन करना और विदुरका दमकी महिमा बताना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.63.18 
सुवृत्त: शीलसम्पन्न: प्रसन्नात्माऽऽत्मविद् बुध:।
प्राप्येह लोके सम्मानं सुगतिं प्रेत्य गच्छति॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य सदाचारी, सदाचारी, प्रसन्नचित्त और आत्मज्ञानी विद्वान है, वह इस लोक में सम्मान पाता है और मृत्यु के बाद उत्तम जीवन पाता है ॥18॥
 
One who is virtuous, well-mannered, happy-hearted and a self-knowledgeable scholar gets respect in this world and gets a good life after death. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)