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mahabharat 5.63.14-15: राजेन्द्र! जिस पुरुष में क्षमा, धैर्य, अहिंसा, समता, सत्य, सरलता, इन्द्रिय संयम, धैर्य, मृदुता, लज्जा, स्थिरता, उदारता, अक्रोध, संतोष और श्रद्धा आदि गुण हैं, वह दानशील (इन्द्रियों पर विजय पाने वाला) माना गया है। 14-15॥   |   mahabharat अध्याय 5.63: दुर्योधनद्वारा अपने पक्षकी प्रबलताका वर्णन करना और विदुरका दमकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 63: दुर्योधनद्वारा अपने पक्षकी प्रबलताका वर्णन करना और विदुरका दमकी महिमा बताना  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  5.63.14-15 
क्षमा धृतिरहिंसा च समता सत्यमार्जवम्।
इन्द्रियाभिजयो धैर्यं मार्दवं ह्रीरचापलम्॥ १४॥
अकार्पण्यमसंरम्भ: संतोष: श्रद्दधानता।
एतानि यस्य राजेन्द्र स दान्त: पुरुष: स्मृत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! जिस पुरुष में क्षमा, धैर्य, अहिंसा, समता, सत्य, सरलता, इन्द्रिय संयम, धैर्य, मृदुता, लज्जा, स्थिरता, उदारता, अक्रोध, संतोष और श्रद्धा आदि गुण हैं, वह दानशील (इन्द्रियों पर विजय पाने वाला) माना गया है। 14-15॥
 
Rajendra! The man who has the qualities of forgiveness, patience, non-violence, equanimity, truth, simplicity, control of senses, patience, softness, shyness, stability, generosity, anger, contentment and faith is considered to be Daant (victorious of senses). 14-15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)