श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 63: दुर्योधनद्वारा अपने पक्षकी प्रबलताका वर्णन करना और विदुरका दमकी महिमा बताना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.63.1 
दुर्योधन उवाच
सदृशानां मनुष्येषु सर्वेषां तुल्यजन्मनाम्।
कथमेकान्ततस्तेषां पार्थानां मन्यसे जयम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन बोला, "पितामह! हम और पाण्डव मनुष्यों में शिक्षा की दृष्टि से समान हैं। हम एक ही कुल में उत्पन्न भी हुए हैं। फिर आप यह कैसे मानते हैं कि युद्ध में केवल कुन्ती के पुत्र ही विजयी होंगे?"
 
Duryodhan said, "Grandfather! We and the Pandavas are equal in terms of education among humans. We were also born in the same family. Then how do you believe that only the sons of Kunti will be victorious in the war?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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