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mahabharat 5.62.7: कर्ण को इस प्रकार बात करते देख भीष्म ने उससे कहा- 'कर्ण! तुम अपनी वीरता का बखान क्यों कर रहे हो? ऐसा प्रतीत होता है कि काल ने तुम्हारी बुद्धि को ग्रस लिया है। क्या तुम नहीं जानते कि यदि तुम, प्रधान योद्धा, युद्ध में मारे गए, तो धृतराष्ट्र के सभी पुत्र लगभग मर ही जाएँगे।'   |   mahabharat अध्याय 5.62: कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसपर आक्षेप, कर्णका सभा त्यागकर जाना और भीष्मका उसके प्रति पुन: आक्षेपयुक्त वचन कहना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 62: कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसपर आक्षेप, कर्णका सभा त्यागकर जाना और भीष्मका उसके प्रति पुन: आक्षेपयुक्त वचन कहना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.62.7 
एवं ब्रुवन्तं तमुवाच भीष्म:
किं कत्थसे कालपरीतबुद्धे।
न कर्ण जानासि यथा प्रधाने
हते हता: स्युर्धृतराष्ट्रपुत्रा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
कर्ण को इस प्रकार बात करते देख भीष्म ने उससे कहा- 'कर्ण! तुम अपनी वीरता का बखान क्यों कर रहे हो? ऐसा प्रतीत होता है कि काल ने तुम्हारी बुद्धि को ग्रस लिया है। क्या तुम नहीं जानते कि यदि तुम, प्रधान योद्धा, युद्ध में मारे गए, तो धृतराष्ट्र के सभी पुत्र लगभग मर ही जाएँगे।'
 
Seeing Karna talking like this, Bhishma said to him- 'Karna! Why are you boasting about your bravery? It seems that time has consumed your intelligence. Don't you know that if you, the chief warrior, are killed in the war, all the sons of Dhritarashtra will be almost dead.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)