Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.62.2: हे राजन! पूर्वकाल में जब मैंने झूठ बोलकर अपने को ब्राह्मण बताया था और परशुरामजी से ब्रह्मास्त्र की शिक्षा ली थी, तब उन्होंने मेरा वास्तविक रूप जानकर मुझसे इस प्रकार कहा था - 'कर्ण! अन्त समय में तुम्हें इस ब्रह्मास्त्र का स्मरण नहीं रहेगा।'॥2॥ | mahabharat अध्याय 5.62: कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसपर आक्षेप, कर्णका सभा त्यागकर जाना और भीष्मका उसके प्रति पुन: आक्षेपयुक्त वचन कहना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजन! पूर्वकाल में जब मैंने झूठ बोलकर अपने को ब्राह्मण बताया था और परशुरामजी से ब्रह्मास्त्र की शिक्षा ली थी, तब उन्होंने मेरा वास्तविक रूप जानकर मुझसे इस प्रकार कहा था - 'कर्ण! अन्त समय में तुम्हें इस ब्रह्मास्त्र का स्मरण नहीं रहेगा।'॥2॥
O King! In the past, when I had falsely claimed to be a Brahmin and had learnt the Brahmastra from Parasurama, he, after knowing my true identity, said to me thus - 'Karna! At the time of your end, you will not remember this Brahmastra.'॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥