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mahabharat 5.62.16: (कर्ण कहा करता था) - राजा अवन्ति, कलिंगराज, जयद्रथ, चेदि, श्रेष्ठ योद्धा और बाह्लीक के उपस्थित होने पर भी मैं शत्रुओं के हजारों-हजारों योद्धाओं को सदैव अकेला ही मार डालूँगा॥16॥   |   mahabharat अध्याय 5.62: कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसपर आक्षेप, कर्णका सभा त्यागकर जाना और भीष्मका उसके प्रति पुन: आक्षेपयुक्त वचन कहना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 62: कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसपर आक्षेप, कर्णका सभा त्यागकर जाना और भीष्मका उसके प्रति पुन: आक्षेपयुक्त वचन कहना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.62.16 
आवन्त्यकालिङ्गजयद्रथेषु
चेदिध्वजे तिष्ठति बाह्लिके च।
अहं हनिष्यामि सदा परेषां
सहस्रशश्चायुतशश्च योधान्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
(कर्ण कहा करता था) - राजा अवन्ति, कलिंगराज, जयद्रथ, चेदि, श्रेष्ठ योद्धा और बाह्लीक के उपस्थित होने पर भी मैं शत्रुओं के हजारों-हजारों योद्धाओं को सदैव अकेला ही मार डालूँगा॥16॥
 
(Karna used to say) - Despite the presence of King Avanti, King of Kalinga, Jayadratha, Chedis, the best warrior and Bahlik, I will always single-handedly kill thousands and thousands of warriors of the enemies. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)