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mahabharat 5.62.13: मैं अपने अस्त्र-शस्त्र त्याग देता हूँ। अब पितामह मुझे इस सभा में या युद्धभूमि में कभी नहीं देख पाएँगे। भीष्म! आपके शान्त होने पर ही समस्त राजा युद्धभूमि में मेरा पराक्रम देखेंगे।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 5.62: कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसपर आक्षेप, कर्णका सभा त्यागकर जाना और भीष्मका उसके प्रति पुन: आक्षेपयुक्त वचन कहना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 62: कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसपर आक्षेप, कर्णका सभा त्यागकर जाना और भीष्मका उसके प्रति पुन: आक्षेपयुक्त वचन कहना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.62.13 
न्यस्यामि शस्त्राणि न जातु संख्ये
पितामहो द्रक्ष्यति मां सभायाम्।
त्वयि प्रशान्ते तु मम प्रभावं
द्रक्ष्यन्ति सर्वे भुवि भूमिपाला:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
मैं अपने अस्त्र-शस्त्र त्याग देता हूँ। अब पितामह मुझे इस सभा में या युद्धभूमि में कभी नहीं देख पाएँगे। भीष्म! आपके शान्त होने पर ही समस्त राजा युद्धभूमि में मेरा पराक्रम देखेंगे।॥13॥
 
I lay down my arms and weapons. Now my grandfather will never see me in this assembly or on the battlefield. Bhishma! Only when you calm down will all the kings see my power on the battlefield.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)