Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.62.10: जो सर्पमुख बाण तुम्हारे निकट चमकता है और जिसे तुम सदैव बड़े यत्न से पुष्पमाला आदि से पूजते हो, वह पाण्डुपुत्र अर्जुन के बाणों से छिन्न-भिन्न होकर तुम्हारे साथ ही नष्ट हो जाएगा॥10॥ | mahabharat अध्याय 5.62: कर्णकी आत्मप्रशंसा, भीष्मके द्वारा उसपर आक्षेप, कर्णका सभा त्यागकर जाना और भीष्मका उसके प्रति पुन: आक्षेपयुक्त वचन कहना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो सर्पमुख बाण तुम्हारे निकट चमकता है और जिसे तुम सदैव बड़े यत्न से पुष्पमाला आदि से पूजते हो, वह पाण्डुपुत्र अर्जुन के बाणों से छिन्न-भिन्न होकर तुम्हारे साथ ही नष्ट हो जाएगा॥10॥
The serpent-headed arrow that shines near you and which you always worship with great efforts, with garlands of flowers etc., will be shattered by the arrows of Arjuna, the son of Pandu, and will be destroyed along with you. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥