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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 61: दुर्योधनद्वारा आत्मप्रशंसा  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.61.20 
नैव देवा न गन्धर्वा नासुरा न च राक्षसा:।
शक्तास्त्रातुं मया द्विष्टं सत्यमेतद् ब्रवीमि ते॥ २०॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! मैं आपसे सत्य कहता हूँ कि देवता, गन्धर्व, दानव और राक्षस भी मेरे शत्रु की रक्षा करने में समर्थ नहीं हैं।
 
Father! I am telling you the truth that even the gods, Gandharvas, demons and devils are not capable of protecting my enemy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)