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mahabharat 5.61.19: यदि ये लोग बिना किसी प्रयास के ही मेरे शत्रुओं की रक्षा करने में समर्थ होते, तो कुन्ती के पुत्रों को तेरह वर्ष तक दुःख न भोगना पड़ता॥19॥   |   mahabharat अध्याय 5.61: दुर्योधनद्वारा आत्मप्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 61: दुर्योधनद्वारा आत्मप्रशंसा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.61.19 
यदि ह्येते समर्था: स्युर्मद्‍‍‍द्विषस्त्रातुमञ्जसा।
न स्म त्रयोदश समा: पार्था दु:खमवाप्नुयु:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यदि ये लोग बिना किसी प्रयास के ही मेरे शत्रुओं की रक्षा करने में समर्थ होते, तो कुन्ती के पुत्रों को तेरह वर्ष तक दुःख न भोगना पड़ता॥19॥
 
Had these people been capable of protecting my enemies without any effort, then Kunti's sons would not have to suffer for thirteen years.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)