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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 60: धृतराष्ट्रके द्वारा कौरव-पाण्डवोंकी शक्तिका तुलनात्मक वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.60.7 
एवमेवोपकर्तॄणां प्रायशो लक्षयामहे।
इच्छन्ति बहुलं सन्त: प्रतिकर्तुं महत् प्रियम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार, मैं प्रायः देखता हूँ कि पुण्यात्मा लोग, सहायक लोगों के उपकारों का बदला चुकाने के लिए, उनके लिए बार-बार महान कार्य करना चाहते हैं।
 
Similarly, I often see that virtuous people, in order to repay the favors of helpful people, want to do great deeds for them again and again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)