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mahabharat 5.60.21: भरत! यही सब सोचकर मुझे रात-दिन नींद नहीं आती। कुरुवंश में शांति कैसे बनी रहे, इसी चिंता ने मेरा सारा सुख छीन लिया है।   |   mahabharat अध्याय 5.60: धृतराष्ट्रके द्वारा कौरव-पाण्डवोंकी शक्तिका तुलनात्मक वर्णन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.60.21 
इत्येवं चिन्तयत् कृत्स्नमहोरात्राणि भारत।
अनिद्रो नि:सुखश्चास्मि कुरूणां शमचिन्तया॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भरत! यही सब सोचकर मुझे रात-दिन नींद नहीं आती। कुरुवंश में शांति कैसे बनी रहे, इसी चिंता ने मेरा सारा सुख छीन लिया है।
 
Bharat! I am unable to sleep day and night thinking about all this. How to maintain peace among the Kuru clan - this worry has taken away all my happiness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)