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mahabharat 5.6.6-7h: विदुर के अनुरोध के बावजूद, धृतराष्ट्र अपने पुत्र के पीछे चले गए। शकुनि स्वयं जुआ खेलने में निपुण थे, और यह जानते हुए कि युधिष्ठिर जुआरी नहीं, बल्कि क्षत्रिय धर्म का पालन करने वाले शुद्धात्मा पुरुष हैं, उन्होंने उन्हें समझा-बुझाकर जुआ खेलने के लिए बुलाया।   |   mahabharat अध्याय 5.6: द्रुपदका पुरोहितको दौत्यकर्मके लिये अनुमति देना तथा पुरोहितका हस्तिनापुरको प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.6.6-7h 
विदुरेणानुनीतोऽपि पुत्रमेवानुवर्तते।
शकुनिर्बुद्धिपूर्वं हि कुन्तीपुत्रं समाह्वयत्॥ ६॥
अनक्षज्ञं मताक्ष: सन् क्षत्रवृत्ते स्थितं शुचिम्।
 
 
अनुवाद
विदुर के अनुरोध के बावजूद, धृतराष्ट्र अपने पुत्र के पीछे चले गए। शकुनि स्वयं जुआ खेलने में निपुण थे, और यह जानते हुए कि युधिष्ठिर जुआरी नहीं, बल्कि क्षत्रिय धर्म का पालन करने वाले शुद्धात्मा पुरुष हैं, उन्होंने उन्हें समझा-बुझाकर जुआ खेलने के लिए बुलाया।
 
Despite Vidur's requests, Dhritarashtra followed his son. Shakuni, being himself an expert in gambling, knowing that Yudhishthir was not a gambler but a pure souled man following the dharma of a kshatriya, called him for gambling after understanding him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)