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स भवान् पुष्ययोगेन मुहूर्तेन जयेन च।
कौरवेयान् प्रयात्वाशु कौन्तेयस्यार्थसिद्धये॥ १७॥
अनुवाद
अतः आप पुष्य नक्षत्र से युक्त जय नामक शुभ समय में कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर के कार्य की सिद्धि के लिए शीघ्र ही कौरवों के पास जाएँ॥17॥
Therefore, you should quickly go to the Kauravas for the accomplishment of the task of Kuntinandan Yudhishthir in the auspicious time called Jai associated with Pushya Nakshatra. 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥