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mahabharat 5.59.29: बल, पराक्रम, तेज, फुर्ती, हाथों की चपलता, दु:ख का अभाव और धैर्य - ये सब गुण कुन्तीपुत्र अर्जुन के अतिरिक्त अन्य किसी पुरुष में नहीं हैं ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 5.59: संजयका धृतराष्ट्रके पूछनेपर उन्हें श्रीकृष्ण और अर्जुनके अन्त:पुरमें कहे हुए संदेश सुनाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.59.29 
बलं वीर्यं च तेजश्च शीघ्रता लघुहस्तता।
अविषादश्च धैर्यं च पार्थान्नान्यत्र विद्यते॥ २९॥
 
 
अनुवाद
बल, पराक्रम, तेज, फुर्ती, हाथों की चपलता, दु:ख का अभाव और धैर्य - ये सब गुण कुन्तीपुत्र अर्जुन के अतिरिक्त अन्य किसी पुरुष में नहीं हैं ॥29॥
 
Strength, bravery, swiftness, quickness, agility of hands, lack of sadness and patience - all these virtues are not present in any other man except Arjuna, son of Kunti.' 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)