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बलं वीर्यं च तेजश्च शीघ्रता लघुहस्तता।
अविषादश्च धैर्यं च पार्थान्नान्यत्र विद्यते॥ २९॥
अनुवाद
बल, पराक्रम, तेज, फुर्ती, हाथों की चपलता, दु:ख का अभाव और धैर्य - ये सब गुण कुन्तीपुत्र अर्जुन के अतिरिक्त अन्य किसी पुरुष में नहीं हैं ॥29॥
Strength, bravery, swiftness, quickness, agility of hands, lack of sadness and patience - all these virtues are not present in any other man except Arjuna, son of Kunti.' 29॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥