श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 58: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना, दुर्योधनका अहंकारपूर्वक पाण्डवोंसे युद्ध करनेका ही निश्चय तथा धृतराष्ट्रका अन्य योद्धाओंको युद्धसे भय दिखाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.58.9 
न त्वं करोषि कामेन कर्ण: कारयिता तव।
दु:शासनश्च पापात्मा शकुनिश्चापि सौबल:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
(मैं जानता हूँ) तुम अपनी इच्छा से युद्ध नहीं कर रहे हो, अपितु पापी दुःशासन, कर्ण और सुबलपुत्र शकुनि तुम्हें ऐसा करने के लिए विवश कर रहे हैं।
 
(I know) you are not fighting the war out of your own will, but the sinful Dushasan, Karna and Subala's son Shakuni are making you do this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)