श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 58: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना, दुर्योधनका अहंकारपूर्वक पाण्डवोंसे युद्ध करनेका ही निश्चय तथा धृतराष्ट्रका अन्य योद्धाओंको युद्धसे भय दिखाना  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  5.58.6-7 
न त्वहं युद्धमिच्छामि नैतदिच्छति बाह्लिक:।
न च भीष्मो न च द्रोणो नाश्वत्थामा न संजय:॥ ६॥
न सोमदत्तो न शलो न कृपो युद्धमिच्छति।
सत्यव्रत: पुरुमित्रो जयो भूरिश्रवास्तथा॥ ७॥
 
 
अनुवाद
देखो, न मैं युद्ध करना चाहता हूँ, न बाह्लीक युद्ध करना चाहता है, न भीष्म, द्रोण, अश्वत्थामा, संजय, सोमदत्त, शाल और कृपाचार्य युद्ध करना चाहते हैं। सत्यव्रत, पुरुमित्र, जय और भूरिश्रवा भी युद्ध के पक्ष में नहीं हैं। 6-7।
 
Look, neither I want to fight, nor Bahlik wants it, nor Bhishma, Drona, Ashwatthama, Sanjaya, Somadatta, Shal and Kripacharya want to fight. Satyavrata, Purumitra, Jai and Bhurishrava are also not in favour of war. 6-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)