श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 58: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना, दुर्योधनका अहंकारपूर्वक पाण्डवोंसे युद्ध करनेका ही निश्चय तथा धृतराष्ट्रका अन्य योद्धाओंको युद्धसे भय दिखाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.58.4 
एतद्धि कुरव: सर्वे मन्यन्ते धर्मसंहितम्।
यत् त्वं प्रशान्तिं मन्येथा: पाण्डुपुत्रैर्महात्मभि:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
समस्त कौरवों का यह धर्मसम्मत मानना ​​है कि आप (महान् पाण्डवों के साथ संधि करके) शांति बनाए रखने के लिए सहमत हो जाएँ॥4॥
 
All the Kauravas consider it to be in accordance with Dharma that you should agree to maintain peace (by making a treaty with the great Pandavas). ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)