श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 58: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना, दुर्योधनका अहंकारपूर्वक पाण्डवोंसे युद्ध करनेका ही निश्चय तथा धृतराष्ट्रका अन्य योद्धाओंको युद्धसे भय दिखाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.58.28 
महावनमिवच्छिन्नं यदा द्रक्ष्यसि पातितम्।
बलं कुरूणां भीमेन तदा स्मर्तासि मे वच:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जब तुम भीमसेन द्वारा कौरव सेना को काटे गए विशाल वन के समान नष्ट होते देखोगे, तब तुम्हें मेरे वचन याद आएंगे॥ 28॥
 
When you will see the Kaurava army destroyed by Bhimasena like a huge forest that has been cut down, then you will remember my words.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)