श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 58: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना, दुर्योधनका अहंकारपूर्वक पाण्डवोंसे युद्ध करनेका ही निश्चय तथा धृतराष्ट्रका अन्य योद्धाओंको युद्धसे भय दिखाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.58.27 
महद् वो भयमागामि न चेच्छाम्यथ पाण्डवै:।
गदया भीमसेनेन हता: शममुपैष्यथ॥ २७॥
 
 
अनुवाद
तुम पर बड़ा भय छाने वाला है। मैं नहीं चाहता कि तुम पांडवों से युद्ध करो। यदि ऐसा हुआ तो तुम भीमसेन की गदा से मारे जाओगे और सदा के लिए शांति में चले जाओगे। 27.
 
A great fear is about to descend upon you. I do not want you to fight with the Pandavas. If it happens, you will be killed by Bhimasena's mace and will be put to peace forever. 27.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)