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mahabharat 5.58.24-25: जब तुम देखोगे कि भीमसेन ने पर्वताकार हाथियों के दांत तोड़ डाले हैं और उनके माथे छेदकर उन्हें रक्त से लथपथ कर दिया है और वे युद्धभूमि में टूटे हुए और गिरे हुए पर्वतों के समान प्रकट हो रहे हैं, तब तुम उन्हें देखोगे और भीमसेन के स्पर्श मात्र से भयभीत होकर तुम्हें मेरी कही हुई बात याद आ जाएगी॥ 24-25॥   |   mahabharat अध्याय 5.58: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना, दुर्योधनका अहंकारपूर्वक पाण्डवोंसे युद्ध करनेका ही निश्चय तथा धृतराष्ट्रका अन्य योद्धाओंको युद्धसे भय दिखाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 58: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना, दुर्योधनका अहंकारपूर्वक पाण्डवोंसे युद्ध करनेका ही निश्चय तथा धृतराष्ट्रका अन्य योद्धाओंको युद्धसे भय दिखाना  »  श्लोक 24-25
 
 
श्लोक  5.58.24-25 
यदा द्रक्ष्यसि भीमेन कुञ्जरान् विनिपातितान्।
विशीर्णदन्तान् गिर्याभान् भिन्नकुम्भान् सशोणितान्॥ २४॥
तानभिप्रेक्ष्य संग्रामे विशीर्णानिव पर्वतान्।
भीतो भीमस्य संस्पर्शात् स्मर्तासि वचनस्य मे॥ २५॥
 
 
अनुवाद
जब तुम देखोगे कि भीमसेन ने पर्वताकार हाथियों के दांत तोड़ डाले हैं और उनके माथे छेदकर उन्हें रक्त से लथपथ कर दिया है और वे युद्धभूमि में टूटे हुए और गिरे हुए पर्वतों के समान प्रकट हो रहे हैं, तब तुम उन्हें देखोगे और भीमसेन के स्पर्श मात्र से भयभीत होकर तुम्हें मेरी कही हुई बात याद आ जाएगी॥ 24-25॥
 
When you will see that Bhimasena has broken the teeth of the mountain-sized elephants and has pierced their foreheads and has made them fall down in a blood-soaked state and they are appearing on the battlefield like broken and fallen mountains, then you will look at them and being frightened even by Bhimasena's touch, you will remember what I have said.॥ 24-25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)