श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 58: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना, दुर्योधनका अहंकारपूर्वक पाण्डवोंसे युद्ध करनेका ही निश्चय तथा धृतराष्ट्रका अन्य योद्धाओंको युद्धसे भय दिखाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.58.21 
प्रतीपमिव मे भाति युयुधानेन भारती।
व्यस्ता सीमन्तिनी ग्रस्ता प्रमृष्टा दीर्घबाहुना॥ २१॥
 
 
अनुवाद
मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि पुरुष द्वारा तिरस्कृत स्त्री के समान भरतवंश की यह सेना महाबाहु सात्यकि द्वारा हड़प ली गई है और कुचल दी गई है तथा अब यह सेना विक्षुब्ध होकर विपरीत दिशा में भाग रही है।
 
It seems to me that like a woman despised by a man, this army of the Bharata dynasty has been taken over and crushed by the mighty-armed hero Satyaki and is now fleeing in the opposite direction in a disarrayed state.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)