श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 58: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना, दुर्योधनका अहंकारपूर्वक पाण्डवोंसे युद्ध करनेका ही निश्चय तथा धृतराष्ट्रका अन्य योद्धाओंको युद्धसे भय दिखाना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.58.20 
रुरूणामिव यूथेषु व्याघ्रा: प्रहरतां वरा:।
वरान् वरान् हनिष्यन्ति समेता युधि पाण्डवा:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार आक्रमणकारियों में श्रेष्ठ रुरु नामक व्याघ्र मृगों के समूह में घुसकर बड़े-बड़े मृगों को मार डालता है, उसी प्रकार योद्धाओं में श्रेष्ठ पाण्डव युद्ध में एकत्र होकर कौरवों के प्रमुख योद्धाओं का संहार करेंगे।
 
Just as the tiger named Ruru, the best among attackers, enters the herd of deer and kills the big ones, similarly the Pandavas, the foremost among warriors, will gather together in the war and kill the chief warriors of the Kauravas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)