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mahabharat 5.58.2: हे भारत के अभिमानी, शत्रु-विनाशक दुर्योधन! तुम्हें युद्ध से निवृत्त हो जाना चाहिए। सज्जन पुरुष किसी भी परिस्थिति में युद्ध की प्रशंसा नहीं करते। 2.   |   mahabharat अध्याय 5.58: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना, दुर्योधनका अहंकारपूर्वक पाण्डवोंसे युद्ध करनेका ही निश्चय तथा धृतराष्ट्रका अन्य योद्धाओंको युद्धसे भय दिखाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 58: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना, दुर्योधनका अहंकारपूर्वक पाण्डवोंसे युद्ध करनेका ही निश्चय तथा धृतराष्ट्रका अन्य योद्धाओंको युद्धसे भय दिखाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.58.2 
दुर्योधन निवर्तस्व युद्धाद् भरतसत्तम।
न हि युद्धं प्रशंसन्ति सर्वावस्थमरिंदम॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे भारत के अभिमानी, शत्रु-विनाशक दुर्योधन! तुम्हें युद्ध से निवृत्त हो जाना चाहिए। सज्जन पुरुष किसी भी परिस्थिति में युद्ध की प्रशंसा नहीं करते। 2.
 
Bharat's pride, enemy-destroyer Duryodhana! You should retire from the war. Noble men do not praise war under any circumstances. 2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)