श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 58: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना, दुर्योधनका अहंकारपूर्वक पाण्डवोंसे युद्ध करनेका ही निश्चय तथा धृतराष्ट्रका अन्य योद्धाओंको युद्धसे भय दिखाना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.58.16 
अहं हि पाण्डवान् हत्वा प्रशास्ता पृथिवीमिमाम्।
मां वा हत्वा पाण्डुपुत्रा भोक्तार: पृथिवीमिमाम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
या तो मैं पाण्डवों को मारकर इस पृथ्वी पर राज्य करूँगा, या पाण्डव मुझे मारकर संसार का राज्य भोगेंगे ॥16॥
 
Either I will kill the Pandavas and rule this earth, or the Pandavas will kill me and enjoy the kingdom of the world. ॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)