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mahabharat 5.58.15: पिताश्री! मैं, कर्ण और मेरा भाई दु:शासन - हम तीनों ही युद्धभूमि में पाण्डवों का विनाश करेंगे।   |   mahabharat अध्याय 5.58: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना, दुर्योधनका अहंकारपूर्वक पाण्डवोंसे युद्ध करनेका ही निश्चय तथा धृतराष्ट्रका अन्य योद्धाओंको युद्धसे भय दिखाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 58: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना, दुर्योधनका अहंकारपूर्वक पाण्डवोंसे युद्ध करनेका ही निश्चय तथा धृतराष्ट्रका अन्य योद्धाओंको युद्धसे भय दिखाना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.58.15 
अहं च तात कर्णश्च भ्राता दु:शासनश्च मे।
एते वयं हनिष्याम: पाण्डवान् समरे त्रय:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! मैं, कर्ण और मेरा भाई दु:शासन - हम तीनों ही युद्धभूमि में पाण्डवों का विनाश करेंगे।
 
Father! I, Karna and my brother Dushasan - we three alone will destroy the Pandavas on the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)