दुर्योधन उवाच
नाहं भवति न द्रोणे नाश्वत्थाम्नि न संजये।
न भीष्मे न च काम्बोजे न कृपे न च बाह्लिके॥ १०॥
सत्यव्रते पुरुमित्रे भूरिश्रवसि वा पुन:।
अन्येषु वा तावकेषु भारं कृत्वा समाह्वयम्॥ ११॥
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा- पिताजी! मैंने सारा भार आप, द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा, संजय, भीष्म, कम्बोजनरेश, कृपाचार्य, बाह्लीक, सत्यव्रत, पुरुमित्र, भूरिश्रवा या आपके अन्य योद्धाओं पर डालकर पांडवों को युद्ध के लिए आमंत्रित नहीं किया है। 10-11॥
Duryodhana said – Father! I have not invited the Pandavas for war by placing the entire burden on you, Dronacharya, Ashwatthama, Sanjay, Bhishma, Kambojanaresh, Kripacharya, Bahlika, Satyavrata, Purumitra, Bhurishrava or your other warriors. 10-11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥