श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 58: धृतराष्ट्रका दुर्योधनको संधिके लिये समझाना, दुर्योधनका अहंकारपूर्वक पाण्डवोंसे युद्ध करनेका ही निश्चय तथा धृतराष्ट्रका अन्य योद्धाओंको युद्धसे भय दिखाना  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  5.58.10-11 
दुर्योधन उवाच
नाहं भवति न द्रोणे नाश्वत्थाम्नि न संजये।
न भीष्मे न च काम्बोजे न कृपे न च बाह्लिके॥ १०॥
सत्यव्रते पुरुमित्रे भूरिश्रवसि वा पुन:।
अन्येषु वा तावकेषु भारं कृत्वा समाह्वयम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा- पिताजी! मैंने सारा भार आप, द्रोणाचार्य, अश्वत्थामा, संजय, भीष्म, कम्बोजनरेश, कृपाचार्य, बाह्लीक, सत्यव्रत, पुरुमित्र, भूरिश्रवा या आपके अन्य योद्धाओं पर डालकर पांडवों को युद्ध के लिए आमंत्रित नहीं किया है। 10-11॥
 
Duryodhana said – Father! I have not invited the Pandavas for war by placing the entire burden on you, Dronacharya, Ashwatthama, Sanjay, Bhishma, Kambojanaresh, Kripacharya, Bahlika, Satyavrata, Purumitra, Bhurishrava or your other warriors. 10-11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)