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mahabharat 5.57.9: केकय के राजकुमार पाँचों भाई लाल ध्वजा लेकर एक अक्षौहिणी सेना लेकर पाण्डवों की सेवा के लिए आ पहुँचे हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 57: संजयद्वारा पाण्डवोंकी युद्धविषयक तैयारीका वर्णन, धृतराष्ट्रका विलाप, दुर्योधनद्वारा अपनी प्रबलताका प्रतिपादन, धृतराष्ट्रका उसपर अविश्वास तथा संजयद्वारा धृष्टद्युम्नकी शक्ति एवं संदेशका कथन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.57.9 
केकया भ्रातर: पञ्च सर्वे लोहितकध्वजा:।
अक्षौहिणीपरिवृता: पाण्डवानभिसंश्रिता:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
केकय के राजकुमार पाँचों भाई लाल ध्वजा लेकर एक अक्षौहिणी सेना लेकर पाण्डवों की सेवा के लिए आ पहुँचे हैं।
 
The five brothers, princes of Kekaya, carrying red flags, have arrived with an Akshauhini army to serve the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)